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  मैं बिहार हूं

मैं बिहार हूं


 मैं बिहार हूं 

बात साल 2005 की है जब बिहार में सत्ता का बदलाव हुआ और मैने नीतीश कुमार को अपने राज्य की बागडोर दी , मुझे लगा जी नीतीश कुमार एक ऐसा राजनीतिज्ञ है जो मेरी खोई हुई गरिमा को वापस लायेगा लेकिन यहां भी मुझे फिर एक बार उदासीन होना पड़ा । 

ऐसा नहीं है की नीतीश कुमार ने बिहार के लिए काम नहीं किया , किया जरूर किया लेकिन वो काम ऐसा नहीं था या है जिससे मुझे फिर से गौरवमई नजरों से देखा जाए ।

एक समय था जब मैं शिक्षा के लिए विश्वविख्यात था और हर वर्ष सैकड़ों की संख्या में संघ लोक सेवा आयोग के माध्यम से देश को आईएएस और आईपीएस देता था लेकिन आज उसकी संख्या घट कर मात्रा 22 हो गई वर्ष 2023 में ।

मैं जिस शिक्षा के लिए मैं पूरे विश्व में जाना जाता रहा आज वही सरकार की गलत नीतियों के कारण बदहाल है ।


संभावनाएं मेरे प्रदेश के छात्रों में अपार है लेकिन आज की शिक्षा व्यवस्था ही दिशाहीन हो गई है ।

मैं बिहार - 

मैने नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री बनाया ये सोच कर की जो बिहार के प्रथम मुख्यमंत्री श्री कृष्ण सिंह ने दुर्गम परिस्थिति में बिहार में उद्योगीकरण की शुरुवात की थी उसे नीतीश कुमार आगे ले जायेंगे और बिहार की वित्तीय स्थिति मजबूत होगी और हमारी गिनती भी एक अग्रणी प्रदेश में होगी लेकिन यहां भी नीतीश कुमार ने मुझे उदास किया और यही मुख्य कारण भी है की मेरे बच्चों को बड़ी संख्या में पलायन करना पड़ता है रोजगार के लिए और मुझे पूरे देश में एक लेबर स्टेट कह कर बुलाया जाता है ।

क्या यही सुनने के लिए मैंने नीतीश कुमार को अपनी बागडोर दी थी ? 


मैं बिहार - 

ऐसा नहीं है की नीतीश कुमार ने काम नहीं किया , किया बिलकुल किया और बिहार में लगातार सड़कों एवं पुलों का निर्माण हुआ और लोक कल्याण की नीतियों पे भी नीतीश कुमार ने काम किया लेकिन मैं आप सभी से पूछना चाहता हूं की क्या सिर्फ सड़कों का निर्माण एवं लोक कल्याण की नीतियां एक राज्य को बेहतर बनाती है ?


मैं बिहार - 

मुझमें 38 जिले समाहित हैं लेकिन अगर स्वास्थ व्यवस्था की बात करें तो आज नीतीश कुमार के करीबन 19 वर्षों के शासन में बड़े स्पेशियलिटी अस्पतालों की सुविधा पटना में छोड़कर और किसी जिले में न के बराबर है और मेरे बिहार के लोग कमज़ोर स्वास्थ व्यस्था के कारण मजबूरन निजी अस्पतालों में जाते हैं और वहां किस प्रकार लूटा जाता है मुझे ये बताने की जरूरत ही नही है । 


मैं बिहार - 

नीतीश कुमार महात्मा गांधी जी के विचारों पे चलते हुए बिहार में शराबबंदी लागू की लेकिन ये बुरी तरह से विफल है । 

शराबबंदी जरूर एक अच्छा कदम है लेकिन इसकी विफलता ये बताती है की नीतीश कुमार की पकड़ प्रशासन पे बिलकुल ही नही है और आज शराबबंदी के कारण बिहार के जेलों में दलितों , पिछड़ों और अति पिछड़ों को डाल दिया गया है । 

मैने इसका अधिकार तो नही दिया था नीतीश कुमार को की एक गलत नीति के कारण लोगों को जेल में डाल दो । 

मैं बिहार - 

मेरा विभाजन वर्ष 2000 में हुआ और मेरे 2 भाग हुए , एक मैं और एक झारखंड ।

विभाजन में मेरी सारी खनिज संपदा झारखंड में चली गई और मेरे पास बची सिर्फ नदियां जो उत्तर बिहार में है और सूखा जो दक्षिण बिहार में । इसके बावजूद मुझमें असीम संभावनाएं हैं क्योंकि नदियों से घिरने से मेरी जमीन खेती के लिए उत्तम बनती है लेकिन श्रीमान नीतीश कुमार यहां भी असफल हो गए , अगर वो चाहते तो पूरे राज्य में खाद्य प्रसंस्करण उद्योग का जबरदस्त जाल बीच सकता था पूरे राज्य में लेकिन मैं एक बार फिर सिर्फ झूठी घोषणाओं का शिकार हुआ और मेरे बिहार के बच्चों का पलायन जारी रहा और मैं बदहाल वही खड़ा रहा ।

तो अब वो समय आ गया है की मैं अपनी बागडोर एक ऐसे राजनीतिज्ञ के हाथों में दूं जो बिहार की खोई गरिमा और गौरव को वापस ला सके इसलिए आप सभी इन सब चीजों को देख समझ के ही चुनाव करें और हां ये चुनाव करने में जात - पात और धर्म को बीच में नहीं आने दें क्योंकि ये मेरे खोए हुए गौरव की बात है ।

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