ग्रामीण साहित्य की सरस्वती थीं उषा किरण खान : डा. ध्रुव कुमार
पटना सिटी I सरल, सहज, बुलंद आवाज़ की मुखर साहित्यकार उषा किरण खान ग्रामीण साहित्य की सरस्वती थीं I जीवन के लगभग सभी आयाम पर उन्होनें कलम चलाई है.... लेकिन ग्रामीण महिलाओं और किसानों की समस्याओं, उनकी अंत: पीड़ा को
गाँव मे बैठकर देखा, समझा और साहित्य लेखन के माध्यम से उनकी
संवेदनाओं को समाज के सामने रखा
उन्होनें रचनाधर्मिता से कभी समझौता नहीं किया l उनकी लेखन शैली में वेदना, प्रेम और समाज के
उत्थान के स्वर मुखर हैं I ग्रामीण संवेदनाओं को उनकी चर्चित कहानी
" दूबधान " से महसूस कर सकते हैं l उन्होनें
अपने साहित्य में महिलाओं को केंद बिंदु में रखा l किसानों की जिवंत गाथा ने उन्हें प्रसिद्धि दिलायी और
पद्मश्री से सम्मानित हुईं I कई पुरस्कार उन्हें साहित्यिक अवदान
के लिए मिले I ये बातें आज महेंद्रू
स्थित व्योम सभागार में एक समान्य
बैठक कर शिक्षाविद, साहित्यकार
डा. ध्रुव कुमार ने कही I साहित्यकार
अनिल रश्मि ( वर्चुअल) ने कहा
उषा जी ना केवल उत्कृष्ट साहित्य विदुषी थीं ब्लकि समाजसेविका भी
थीं I उन्होनें समाज के लिए कई
कार्य किए... साथ ही हाशिये पर
रहीं महिला साहित्यकारों के लिए
" आयाम " संस्था का निर्माण कर
नई पीढ़ी की युवा महिलाओं को
लेखन के लिए प्रेरित किया और उनकी रचनाओं को समाज के सामने
पुस्तक के रूप में लाकर साहित्यकार
की श्रेणी में स्तंभित किया, जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकेगा I स्त्रियों के लिए साहित्य- संबल थीं I
अपनी श्रेष्ठतम कार्यों में सदैव जिवित
रहेंगी उषा खान I स्वरांजलि परिवार के साथ बैठक में शामिल प्रभात कुमार धवन, नेक आलम ( शिक्षाविद) नितिन कुमार वर्मा,
जितेन्द्र कुमार पाल, आलोक चोपड़ा
राजा puttu, सचिनद्र नारायण मिश्र, डा. सूर्य प्रताप, डा.मुजाहिद
हुसैन, डा. विजेन्दर चाँद्रवंशी ने
उषा जी के चरणों में आत्म- सुमन
अर्पित की I इस आशय की जानकारी मीडिया प्रभारी जितेंद्र पाल
ने दी l
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